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मुंबई हमले का अब तक का एक अनदेखा विडियो

हाफ़िज़ मोहम्मद सईद, ये नाम शायद आप में से कुछ लोगो ने सुना होगा या फिर कही पढ़ा होगा. अगर नहीं पढ़ा है तो आपकी जानकारी के लिए बतला दूँ की ये सईद महाशय चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा का संस्थापक हैं. इसने 2001 में लश्कर का नेतृत्व छोड़कर जमात-उद-दावा की कमान संभाल ली थी.

मुंबई हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र ने जमात-उल-दावा को 'आतंकवादी संगठन' घोषित कर दिया था जिसके बाद पाकिस्तान में इस संगठन पर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी. सईद की पिछले साल 26 नवंबर को मुंबई पर हुए चरमपंथी हमलों में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को तलाश है। इसके तहत 12 दिसंबर, 2008 हाफ़िज़ मोहम्मद सईद और इसके कुछ सहयोगियों को एक महीने के लिए उसके घर में ही नज़रबंद कर दिया गया था, बाद में नज़रबंदी की मियाद बढ़ा दी गई थी. क़रीब छह महीने की नज़रबंदी के बाद सईद को लाहौर हाई कोर्ट के निर्देश पर दो जून को रिहा कर दिया गया था.

हाई कोर्ट ने सईद की रिहाई के आदेश देते हुए कहा था कि सरकार उनके मुंबई हमलों में शामिल होने का कोई सबूत नहीं दे पाई है. आइये आगे बढ़ने से पहले मुंबई हमले से सम्बंधित एक नज़र इस होश उड़ा देने वाले विडियो को देखे.

video


मुंबई हमलो के बारे में अब तक भारतीय मीडिया में अप्रकाशित और अप्रत्याशित रूप से चौकाने वाला मौलिक विडियो देखने के लिए यहाँ पर भी क्लिक कर सकते है.


इस विडियो से ये बात तो स्पष्ट है की हमले में लश्कर का हाथ था. साथ ही हमारे मीडिया की जिम्मेवारी का भी आंकलन जरुरी है. हमारे देश के न तो मीडियाकर्मी और न ही पुलिस वाले इतने प्रशिक्षित होते है की इस तरह की संवेदनशील मुद्दों पर जवाबदेही के साथ काम कर सके. ये बात बिलकुल ठीक है की पडोसी मुल्क ने इस कमजोरी का फायदा उठाया लेकिन कहीं न कही, जाने अनजाने में मीडिया ने लाशो की संख्या बढाने और सीमा पर बैठे हुए दरिंदो को मदद की.

अब इसके बाद भी हमारी सरकार बयानबाजी करती रहती है और पडोसी मुल्क हमारे द्वारा दिए गए प्रत्येक सबूत और प्रमाण की धज्जिया उडाता रहता है. यहाँ गौरतलब तथ्य ये है की हाल ही में अमरीकी सीनेट ने पाकिस्तान को असैनिक कार्यों के लिए दी जाने वाली सहायता तीन गुना करने संबंधित बिल को मंज़ूरी दे दी है. इन लोगों का कहना है कि बिल के ज़रिए ये जताया जा सकेगा कि इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ़ लड़ाई में अमरीका पाकिस्तान के साथ है और वो उसका हित चाहता है. इसमें ख़ास बात ये है की अमेरिका ने पाकिस्तानी में राजनीतिक या न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप की बात नहीं है. और सबसे ख़ास बात की पहले इस बिल में लिखा गया था कि पाकिस्तानी ज़मीन से भारत के ख़िलाफ़ आंतकवादी गतिविधियाँ न हों. लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया. हुआ न मेरा भारत महान और भारत के नेता अपने ही देश जनता को बेवकूफ बना कर अपना उल्लू सीधा करने में महानतम.

3 comments:

‘नज़र’ said...

शुक्रिया

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चर्चा । Discuss INDIA

Udan Tashtari said...

आभार इस लिंक का.

seema gupta said...

चोंकाने वाला सत्य.....आभार इस लिंक के लिए

regards