कार्बन ट्रेडिंग क्या होती है
कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए क्योतो संधि में एक तरीक़ा सुझाया गया है जिसे कार्बन ट्रेडिंग कहते हैं. यानी कार्बन डाइऑक्साइड का व्यापार. ये योजना केवल विकसित देशों पर ही लागू है. इसमें होता ये है कि कोई विकसित देश किसी विकासशील देश में ऐसी योजना अपनाता है जिससे ग्रीन हाउस गैसों में कमी लाई जा सके. वह इसके लिए धनराशि और तकनीकि सहायता भी देगा और इससे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में जो कमी आएगी उसका लाभ उसे मिलेगा. उदाहरण के लिए ब्रिटेन, भारत में कोयले की जगह सौर ऊर्जा की कोई परियोजना शुरु करे. इससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा जिसे आंका जाएगा और फिर उसका मुनाफ़ा ब्रिटेन को मिलेगा
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Bhavesh (भावेश )
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Wednesday, February 04, 2009
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पेटेंट और कॉपीराइट में क्या अन्तर है.
पेटेंट एक ऐसी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत किसी भी नई खोज से बनने वाले उत्पाद पर एकाधिकार दिया जाता है. उसके बाद कोई भी उस उत्पाद को न बना सकता है न बेच सकता है. अगर बनाना चाहे तो उसे लाइसैंस लेना पड़ेगा और उसपर रॉयल्टी देनी होगी. इस पेटेंट की अवधि पहले हर देश ने अपने-अपने हिसाब से तय की हुई थी लेकिन अब विश्व व्यापार संगठन ने उसे बीस साल कर दिया है. इसके साथ प्रौसैस पेटेंट भी होता है जिसका संबंध नई प्रौद्योगिकी से है. किसी भी नई तकनोलॉजी पर भी पेटेंट लिया जा सकता है. हरेक देश में पेटेंट कार्यालय हैं. अपने उत्पाद या तकनोलॉजी पर पेटेंट लेने के लिए इस कार्यालय में अर्ज़ी दें और साथ ही अपनी नई खोज का ब्योरा दें. उसके बाद पेटेंट कार्यालय उसकी जांच करेगा और अगर वह उत्पाद या तकनोलॉजी नई है तो पेटेंट का आदेश जारी कर देगा. लेकिन पेटेंट का ये आदेश जिस देश में जारी किया जाता है उसकी सीमाओं के भीतर ही लागू माना जाता है. जहां तक कॉपीराइट का सवाल है तो कॉपीराइट किसी मौलिक लेखन, संगीत, कलाकृति, डिज़ाइन, फ़िल्म या तस्वीरों पर होता है.
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Wednesday, February 04, 2009
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तुलसी रामायण और वाल्मीकि रामायण में क्या अंतर है
तुलसी रामायण का नाम रामचरित मानस है और इसकी रचना सोलहवीं शताब्दी के अंत में गोस्वामी तुलसीदास ने अवधि बोली में की. जबकि वाल्मीकि रामायण कोई तीन हज़ार साल पहले संस्कृत में लिखी गई थी. इसके रचयिता वाल्मीकि को आदि कवि भी कहा जाता है. क्योंकि उन्होंने अपने इस अदभुत ग्रंथ में दशरथ और कौशल्या पुत्र राम जैसे एक ऐसे मर्यादा पुरुषोत्तम की जीवन गाथा लिखी जो उसके बाद के कवियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी. उसके बाद अलग-अलग काल में और विभिन्न भाषाओं में रामायण की रचना हुई. लेकिन प्रत्येक रामायण का केंद्र बिंदु वाल्मीकि रामायण ही रही है. बारहवीं सदी में तमिल भाषा में कम्पण रामायण, तेरहवीं सदी में थाई भाषा में लिखी रामकीयन और कम्बोडियाई रामायण, पंद्रहवीं और सोलहवीं सदी में उड़िया रामायण और कृतिबास की बँगला रामायण प्रसिद्ध हैं लेकिन इन सबमें तुलसी दास की रामचरित मानस सबसे प्रसिद्ध रामायण है.
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Wednesday, February 04, 2009
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सिक्स्थ सेंस यानी छठी इंद्री को जागृत करने का क्या उपाय है
यह परामनोविज्ञान का विषय है। कुछ लोगों में ऐसी क्षमताएँ पाई गई हैं जिनकी व्याख्या करना मुश्किल होता है. जैसे भविष्य की घटनाएं देख पाना, लोगों के बारे में ऐसी जानकारी पा जाना जिसे सामान्य रूप से जानना संभव नहीं, मीलों दूर बैठे किसी व्यक्ति की बात सुन या एक जगह होते हुए किसी और जगह पहुंच पाना. लेकिन क्योंकि यह विज्ञान का विषय नहीं है इसलिए इसे प्रमाणित करना भी मुश्किल है. इसे ऐक्स्ट्रा सैन्सरी परसैप्शन या अतिरिक्त संवेदी बोध का नाम दिया गया है. यानि वह बोध जो हमारी पाँच इंद्रियों के बोध से परे है. इस पर बहुत से अध्ययन हुए हैं और हो रहे हैं लेकिन इसे मानने वालों और न मानने वालों के बीच बहस जारी है.
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Wednesday, February 04, 2009
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जब हम घबराते हैं तो हमें पसीना क्यों आता है.
जब हम डरते या घबराते हैं तो हमारा मस्तिष्क, हमारे केंद्रीय स्नायु तन्त्र या सैंट्रल नरवस सिस्टम को चौकन्ना कर देता है जिससे हमारी नाड़ियां सक्रिय हो उठती हैं और हमारे ऐड्रिनल ग्लैंड या अधिवृक्क ग्रन्थि से ऐपाइनफ़्राइन का रिसाव होने लगता है. इनसे हमारे पसीने की ग्रंथियाँ सक्रिय हो उठती हैं और हमें पसीना छूटने लगता है. हमारे शरीर में पसीने की कोई 50 लाख ग्रंथियाँ हैं. इनमें से अधिकांश हमारी हथेली में हैं. और बाकी की ग्रंथियों में से अधिकतर हमारी बगल और पैरों के तलवे में हैं.
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Wednesday, February 04, 2009
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